February 7, 2009

जब जब तुने मेरा नाम लिखा - आश्विन

बारिश हुयी..तू छम छम सी चली..कभी इधर डोली..कभी उधर फिसली..तेरी हर आहट पे मुझे ऐसा लगा..जैसे तुने बारिश पे मेरा नाम लिखा..

जब तुने मुड़ के मुझे देखा तो मैंने देखा..तेरी नज़र झुकी..और तू अपने पाँव के अंगूठे से ज़मीन पे कुछ लिखने लगी..मुझे लगा तुने मेरा नाम लिखा..

ओस तेरी खिड़की के कांच पे ठहर गई थी..तुने अपने होंठ गोल कर के ओस पे अपनी साँसे छोड़ी ...कुछ अक्षर उभर आए अचानक...अ ...श ...वि ...न........तेरी साँस साँस मेरा नाम कहने लगी..


तू कल रात अपनी उंगलियाँ फिराती रही बहुत देर तक मेरी हथेली पे..मुझे लगा मेरी किस्मत की लकीरों में तुने अपना नाम लिखा..

2 comments:

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  2. achhi...............yash...

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