February 20, 2009

करवट-अश्वनी

करवट पे करवट
सुकून की तलाश में ॥
बिस्तर के सवाल
जिस्म लाजवाब
बगलें झांके, देखे इधर उधर ॥
अकेली करवट, जैसे एक मक्खी तड़पे जाने को बाहर शीशे के फ्रेम से ॥
एक किताब से शब्द वाष्पित हुए धूप में रखते ही
पानी में रखने से वापिस लौट आए मगर कुछ शब्द हैं मिसिंग ॥
किताब से कुछ शब्द चुरा के हवाओं ने एक ख़त लिखा
एक कश्ती बना के ख़त की बादलों पे चला दी ॥
मक्खी अब भी तड़प रही है ...... करवटें जारी हैं

7 comments:

  1. बहुत सुंदर…..आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

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  2. thik hai,ab band ho sakti hai. narayan narayan

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  3. वाह क्या अन्दाज है आगाज़ का-जगत पर आपका स्वागत श्यामसखा श्याम

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  4. मगर कुछ शब्द हैं मिसिंग....

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  5. sabka shukriyaa..koshish jaari rahegi.

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  6. ब्लोगिंग जगत मे स्वागत है
    शुभकामनाएं
    कविता,गज़ल और शेर के लि‌ए मेरे ब्लोग पर स्वागत है ।
    मेरे द्वारा संपादित पत्रिका देखें
    www.zindagilive08.blogspot.com
    आर्ट के लि‌ए देखें
    www.chitrasansar.blogspot.com

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  7. kya baaat...........yash.....

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