February 17, 2009

मेरे रिक्त स्थान-अश्वनी

मेरे रिक्त स्थान हैं हजारों
हजारों में हजारों स्थान रिक्त हैं ।
रिक्त है मेरे हिया का गान
मेरा हर साज रिक्त है ।
रिक्त है हस्ती मेरी , मेरा वजूद रिक्त है ।
सिमटी सी मेरी हर आहट रिक्त है ।
रिक्त है प्याला मेरा , मेरी मधुशाला रिक्त है ।
रिक्त हो चला है अहम् मेरा , मेरा हर वहम रिक्त है ।
मेरी हथेली रेखाओं से रिक्त है , मेरा लहू शिरायों में रिक्त है ।
रास्ता मेरा मंजिल से रिक्त है , बादल मेरा बारिश से रिक्त है ।
इस कदर रिक्त हुआ हूँ मैं पिछले कुछ सालों में....
मेरे भीतर भी रिक्त है..मेरे बाहर भी रिक्त है ।
मेरा सारे रिक्त रिक्त हैं।
रिक्त स्थान मेरे भरने चली आई वो ना जाने कहाँ से ।
मुझे उसने इस लायक पाया ना जाने कहाँ से ।

5 comments:

  1. Riktata ka aisa chitran.. durlabh hai !
    Yahi 'durlabhta' le ayee hogi usse yahan tak !!
    Shubhkamnayen.

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  2. usse??kise?kaun hai wo?aap jaanti hain kya usse?kahin mile toh kahiyega humne yaad kiya hai..

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  3. apki kavitayein mein jaan hai...apke likhe hue shbdo mein ek zingagi se ladne ki umeed jaagti hai..

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  4. shukriya sudeep...apko kuchhh mile humaare kisi vichaar se toh bas woh vichaar safal hua samajhiye

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  5. kamaaaaaaaaaaaaaaaal..........yash...

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