June 5, 2010

आत्मबोध-अश्वनी

जीना झीना झीना....

मरना सघन सघन......

करना कुछ छ्लावा छ्लावा......

ना करना मगन मगन.....

पाना है इक प्यास....

ना पाना लगन लगन...

2 comments:

  1. nanhi si pyari si poem...ya ..vichar...yash

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