मस्त बारिश में मलंग... माधवी के संग

देखा पानी लगी प्यास... ऐसा ही है मेरा ब्लॉग की दुनिया में आना। देखा-देखी। दूर-दूर तक कोई इरादा नहीं था, पर अब जब सभी लोग कर रहे हैं तो सोचा हाथ आज़माया जाए। पर इतना तय है कि अब आ गया हूं तो कुछ अच्छा करके ही जाऊंगा।

November 16, 2018

नासमझ

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कुछ बातें ना मुझे तब समझ आती थीं ना अब आती हैं कुछ उलझाने ना मुझसे तब सुलझती थीं ना अब सुलझती हैं अब या तो गाँठ ज्यादा उलझी है या...
November 8, 2018

पुतला पुतला खेलें??

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पुतला बनने पे तुम रोये  और अफगानिस्तान में पुतले गिरने पे भी तुम रोये मैं हमेशा से पुतलों के खिलाफ था पर तुम्हारा stand समझ नही आया...
September 22, 2018

गणपति बप्पा मोरया

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हर साल होंगे विसर्जित गणपति। हर साल कुछ लोग डालेंगे फोटुएं विखंडित गनपतियों की मरती मछलियों की और फिर अगले साल पहले से कुछ और ज़्या...
April 19, 2017

गरीब की मौत है

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निर्धन= गरीब निर्धन= बिना धन का निधन= मौत निधन= बिना धन का निर्धन= निधन गरीब= मौत
October 23, 2016

मध्यमवर्ग..

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मध्यमवर्ग हावी है.... निराशा अवश्यम्भावी है !!!  नोट- कृपया इन 2 पंक्तियों को पढ़कर आशावादी बनने की मुफ्त सलाह ना दें !!
July 29, 2016

ज़िद्दी परिंदा

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बढ़ता पेट घटता रेट ज़ालिम सेठ नींद बेवफ़ा सपने सफा उम्मीद रफा-दफा हाथ में कंपन पैर में झनझन दिमाग में सनसन पर सोच है ज़िन्दा ज़ि...
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July 28, 2016

कविता मेरी

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दिल में जन्मी बाज़ार में दम तोड़ गई कविता मेरी

तू

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किस्सा था कहानी थी याद नहीं बचपन था जवानी थी याद नही याद है बस इतना तू पास नहीं तेरे आने की कोई आस नहीं
July 27, 2016

फ़ितरत

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ऑटो में बैठा तो पैदल चलने वालों को हिकारत से देखा कार में बैठ के ऑटो वालों पे गुस्सा आया पैदल चला तो कार वाले को गाली दी शुक्र है सड़क...
July 11, 2016

काश......

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कहीं घुमते-फिरते दिख जाता है कोई नया भूखंड या कोई नया परिदृश्य या स्थान तो लगता है ऐसे कि पा लिया सारा जहां जीत ली सारी दुनिया हालाँ...
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March 8, 2016

एक चुप..सौ सुख

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जब हर कुत्ता बिल्ला भोंक रहा था मैंने चुप रह जाना बेहतर समझा जब हर कोई सहिष्णुता असहिष्णुता पे अपने ब्यान ठोक रहा था मैंने चुप रह जाना ब...
January 3, 2016

जब प्रेमिका पुकारे....'भाई साब'

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जैसे बरसों बाद आइना देखो तो खुद को पहचानना होता है मुश्किल !! वैसे ही कुछ साल बीत जाने के बाद अपनी लिखी कविताएं भी लगती हैं अपरिचित !!! जै...
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December 1, 2015

टीचर फटीचर पार्ट 2

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फटीचर टीचरों के हाथों मार खा-खा कर हम बच्चे इतने अभ्यस्त हो चुके थे कि हमें लगता था यही हमारी नियति है और सारे संसार के स्कूलों में भी बच्...
October 4, 2015

कमाल है...

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जब ज़िंदगी डेंगू, मलेरिया के साथ-साथ देश में फैल रही अराजकता के बीच कट रही थी ! जब यू-ट्यूब, फेसबुक और व्हाट्स-ऐप के वीडियो मनोरंजन कम और...
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September 25, 2015

उम्र चालीसा

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ख़तरनाक पड़ाव है उम्र चालीस ज़्यादा मांगती है कम देती है ना झपटने की ताक़त होती है ना मांगने की हिम्मत होती है बहुत ज़ोर लगाना पड...
September 18, 2015

टीचर फटीचर (पार्ट-1)

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ये सब मैं टीचर डे पर लिखना चाहता था, जब सारा फेसबुक टीचर नाम के एक प्राणी और एक उपाधि का महिमामंडन करने में लगा हुआ था। जो उपाधि हमारे स...
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April 4, 2014

एक वरदान - अश्वनी

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लम्बी उम्र की कामनाओं के बीच  कुछ समय के लिए  मर जाने का वरदान मांग लूँ  अगर कोई भगवान  हो जाए मेहरबान  लगातार दौड़ते दिमागी घोड़ो...
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January 7, 2013

बहुत दिन बाद - अश्वनी

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लिखने से  अच्छा है  पढ़ना  बोलने  से  सुनना रूठने  से  मानना  हटने  से जुड़ना  बचने  से  जूझना  गिनने  से  लुटाना  ...
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November 24, 2012

रोशनी के साथ जादू की झप्पी-अश्वनी

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सूरजमुखी का फूल याद आते ही आंखों के सामने आ जाता है एक हंसता-खिलखिलाता चेहरा... आपने कभी ध्यान से सूरजमुखी को देखा है ? ऐसा ल...
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September 13, 2012

कमबख्त - अश्वनी

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कविता लिखने कलम उठाई मुद्दों विचारों सोचों का मचा झंझावात कलम रखी सो गया कमबख्त नींद भी नहीं आई
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August 20, 2012

तूने - अश्वनी

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चन्द लम्हे   कंपन से गुज़रा हाथ लकीरें गडमड हो गई एक छोटी सी कंपन ने तकदीर बदल डाली गुनाह के रस्ते पे था  अकेला  भटकन थी डगर  तूने ...
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August 16, 2012

घुमंतू - अश्वनी

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घुमंतू आत्मा कैद शिथिल जिस्म में घुमंतू सोच कैद कुंद दिमाग में घुमंतू प्रेम कैद बासी सम्बन्ध में घुमंतू नज़र कैद जबरन नकाब म...
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August 14, 2012

अक्षम आँख - अश्वनी

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हलचल हुई हिया हिला ताके टुकुर टुकुर अपना अक्स झिलमिल झिलमिल धुंधला धुंधला हाथ बढ़ा पोछा आइना आइना चमका अक्स धुंधला मगर घाव अंदर...
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July 24, 2012

काहे ? - अश्वनी

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टिक टिक टप टप धप धप   समय सरका पानी बरसा कदम धमका     ठक ठक  चिप चिप  दिप दिप  द्वार खटका  बदन तमका मुख चमका  ल...
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July 17, 2012

ऐ - अश्वनी

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सिलसिलो टूटो किस्मत   चमक   आह कर असर मेहनत हो सफल प्यार आ ख़ुशी ठहर सोच अच्छा सोच समय कट संताप घट ऐ ज़ि...
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July 6, 2012

ऐसे कैसे चलेगा??? - अश्वनी

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सीप सा जीवन मोती चोरी लेकिन हथेली बरक़रार लकीरें गायब लेकिन दिल प्रस्तुत धड़कन शांत लेकिन आंखें खुली दृष्टि धुंधली मगर कदम काय...
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July 2, 2012

मेरी इक नन्ही कहानी -अश्वनी

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क़िस्से क़िस्म क़िस्म के क़िस्म क़िस्म के लोग लंबे लंबे क़िस्सों में मेरी इक नन्ही कहानी सांस लेने को निकालती मुंह चादर से तभी कोई बड...
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तब ना - अश्वनी

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अगर मगर से पार होते तब ना बोलते ओ.के   अंतु परन्तु किंतु से बचते तब ना साथ आते कैसे होगा,क्या होगा से हटते तब ना कदम मिलाते  झिझक क...
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May 28, 2012

किस्मत हो सकता है इसका शीर्षक - अश्वनी

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बहना नाँव की किस्मत है डूबना भी नदी की किस्मत है सागर बाँध भी चमकना चाँद की किस्मत है ग्रहण भी मिट्टी की किस्मत है जिस्म खिलौना भी ध...
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May 8, 2012

ख़्वाबों में ख़्यालों में - अश्वनी

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मेरी नींद में इक ख़्वाब है  मेरी नींद इक ख़्वाब है  ख़्वाब में अक्सर कह देता हूँ दिल की  ख़्वाब में अक्सर समझता हूँ उसके दिल की ख़्वाब की ज़...
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May 2, 2012

बिना यादों के - अश्वनी

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यादों ने जब सताया  यंत्रणा की हद तक मैंने मांगी मन्नत ख़तम हो यादें पाताल में जाए यादों का सिलसिला मन्नत हुई पूरी एक सुबह जब जागा तो  खुद ...
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April 30, 2012

दिल -अश्वनी

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रात दिन दस्तक दिल के दरवाज़े  बंद कपाट खुले दिल का आमंतरण दिल को दिल से दिल मेज़बान दिल मेहमान  दिल से परोसा दिल  दिल से लगाया दिल  दिल में ...
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April 29, 2012

निर्णय - अश्वनी

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मैं उसके आने की राह देखूं  या खुद ही पहुँच जाऊं उस तक छुरा खरबूज़े पे गिरे या खरबूज़ा छुरे पर क्या फ़र्क पड़ता है? ये खरबूज़े वाली उद...
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April 28, 2012

अच्छा दिन - अश्वनी

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अच्छा दिन था 24 घंटे में ही पूरा हो गया कुछ ढीठ दिन  बरसों ख़तम नहीं होते
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April 24, 2012

आप क्या कहते हैं? - अश्वनी

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जागने सोने कि हद जब मिटने लगे  तो  सोया सोया जागूं  और  जागा जागा सोऊँ मुझे अच्छा लगता है होने और ना होने के बीचे होना  मुझे अच्छा नही...
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April 23, 2012

मैं और तू - अश्वनी

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बहुत दिन हुए खुद से बात हुए बहुत दिन हुए तुमसे बात हुए फुर्सत तुम्हे नहीं फुर्सत हमें कहाँ तेरा अपना जहां मेरा अपना जहां  तेरा रस्ता क...
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बारिश - अश्वनी

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बारिश में क्या है ऐसा कि आ रही है तो गुदगुदाती रहती है ना आए तो इंतज़ार और आ के हटी हो तो खुशबू , यादें और किसी की...
4 comments:
April 21, 2012

सपना रे - अश्वनी

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मैं हर दिन कविता कह सकता हूँ क्योंकि मैं हर रोज़ कोई न कोई सपना देखता हूँ सपने को शब्द दे दो तो कविता हो सकती है ऐसा मैंने पाया है ज...
4 comments:

रूठा रूठी - अश्वनी

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उसे सही से रूठना नहीं आता पर मुझे आता है मनाना सही से वो अक्सर रूठती है बिना किसी विशेष कारण के या फिर मेरे मनाने के लिए मैं ब...
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प्रेमिका सी कविता - अश्वनी

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प्रेमिका सी कविता कई दिन के बाद मिलो तो बात नहीं करती आसानी से अनमनी सी रहती है रूठी धीरे धीरे खुलती है पंखुड़ी सी उलाहना सा दे...
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April 8, 2012

सोच का चक्का जाम - अश्वनी

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झिलमिल तस्वीर दिखे जब साफ़ आँखों से तब ख़लल दिमाग का है दोषी दिमाग में घूमता इक सर्प कुंडली मारे लपेटता है मगज़ स्पष्ट को करता धुंधला धु...
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March 24, 2012

बहरूपिया -अश्वनी

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मेरा मेरा मेरा  इतना मेरा है ज़िन्दगी में  कुछ और सुझाई नहीं देता कुछ और दिखाई नहीं देता कभी देखे जो तेरा इसका उसका  उस दृष्टि पर उतर ...
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March 22, 2012

सिली ओल्ड मी - अश्वनी

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फिर वही विचार वही सोच वही उधेड़बुन अपनी पूंछ को मुंह में दबाने को गोल गोल घूमता जैसे कुत्ता पता नहीं क्यों  जंगल बहुत आता है तस्वीर बन...
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March 18, 2012

वैष्णव जनतो तेने कहिए जे -अश्वनी

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कसमसाहट नहीं हटती बैचनी नहीं घटती बेसूकूनी नहीं जाती कोई ऐसा है? जो शांत रहा हो..चैन से जिया हो..सुकून से गया हो अगर ऐसा है कोई तो व...
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ऐसे ही एक ख्याल - अश्वनी

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रात हुई नींद कहाँ? सुबह आएगी जाग कहाँ? दिन होगा काम कहाँ? दोपहर होगी आराम कहाँ? शाम होगी शाम कहाँ? रात होगी नींद कहाँ? सपने भी क...
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March 14, 2012

दिल से रे - अश्वनी

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अन्तरिक्ष अनोखा दिल झरोखा दिल ग्रह दिल उपग्रह दिल उल्का दिल का तारामंडल अन्तरिक्ष यात्री दो दिलवाले अन्तरिक्ष यान में बैठ दिल की कर...
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March 13, 2012

तेरा साथ है तो - अश्वनी

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तुम और मैं जैसे मैं और तुम तुम मैं सी मैं तुम सा तुम मुझे समझ नहीं आती मुझे तुम समझ नहीं पाती समझ से हट के देखा मैंने तुम्हें तुम...
3 comments:
March 6, 2012

कहीं - अश्वनी

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इतनी बातें घुमड़ती हैं मन में मन नहीं रहता तन में देह छोड़ पकड़ इक अनजान डगर वो फिरता है मारा मारा कहीं वो चाहता है दिल देना कहीं वो चा...
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March 3, 2012

दैट्स वट आई लाइक द मोस्ट अबाउट यू - अश्वनी

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तेरी हाँ से पहले मुझे लगने लगा था मुझमें कुछ कमी है मैं नहीं हूँ प्यार के काबिल प्यार छूता था मुझे पर गले नहीं लगता था प्यार से आत्मवि...
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March 2, 2012

वादा- अश्वनी

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तुम तुम हो जैसे तुम हँसती हो वैसे हँसने को तुम्हारा सा दिल चाहिए मासूम और सुंदर तुम तुम हो जैसे तुम देखती हो वैसे देखने को तुम्हार...
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इनकमिंग फ्री - पंकज त्रिवेदी

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मेरी "लाल रंग का फ़ोन" पर मित्र पंकज त्रिवेदी की कमेन्ट के रूप में लिखी गई कमाल कविता.. बचपन में देखा था मैंने लालजी बनिए के वहां...
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