बहना नाँव की किस्मत है
डूबना भी
नदी की किस्मत है सागर
बाँध भी
चमकना चाँद की किस्मत है
ग्रहण भी
मिट्टी की किस्मत है जिस्म
खिलौना भी
धड़कना दिल की किस्मत है
टूटना भी
इज़हार की किस्मत है हाँ
ना भी
उड़ना पतंग की किस्मत है
कटना भी
किस्मत की किस्मत है खुल जाना
बंधना भी
मेरी किस्मत है तू
नहीं भी
हाँ...
ReplyDeleteकिस्मत हो सकता है शीर्षक
नहीं भी....
सब किस्मत का ही तो खेल है :-)
ReplyDeleteसब किस्मत का ही कमाल है ... जो है और जो नहीं भी ...
ReplyDeleteसब कुछ किस्मत ही है .... मगर क्या किस्मत आपके हाथों में नहीं ...
बहुत ही बेहतरीन और प्रशंसनीय प्रस्तुति....
ReplyDeleteइंडिया दर्पण पर भी पधारेँ।
ऐसा क्यों सोचते हैं आप जैसा मैं ?
ReplyDeleteअश्विनी,
ReplyDeleteबहुत अच्छे.मज़ा आ गया.
अश्विनी, किस्मत में मैं नहीं मानता पर आप की इस कविता में मानता हूँ.सुन्दर रचना.
ReplyDeleteRaju bhai..bahut shukriya..
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