देखा पानी लगी प्यास... ऐसा ही है मेरा ब्लॉग की दुनिया में आना। देखा-देखी। दूर-दूर तक कोई इरादा नहीं था, पर अब जब सभी लोग कर रहे हैं तो सोचा हाथ आज़माया जाए। पर इतना तय है कि अब आ गया हूं तो कुछ अच्छा करके ही जाऊंगा।
February 9, 2009
अभी साँस है बाकी - अभी जान है बाकी - आश्विन
साँसे सूख रही हैं ज़रा सी..पकड़ छूट रही है ज़रा सी..
ज़रा सी आँख धुंधला रही है..ज़रा सी नींद आ रही है..
umdaaaa....achhiiiii.......yash...
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