देखा पानी लगी प्यास... ऐसा ही है मेरा ब्लॉग की दुनिया में आना। देखा-देखी। दूर-दूर तक कोई इरादा नहीं था, पर अब जब सभी लोग कर रहे हैं तो सोचा हाथ आज़माया जाए। पर इतना तय है कि अब आ गया हूं तो कुछ अच्छा करके ही जाऊंगा।
June 2, 2010
उदासी-अश्वनी
जब दिल उदास हो तो उदासी का मज़ा लो....
जब खुश हो दिल तो उदासी खोजने निकल पढ़ो...
उदासी स्थाई भाव बन जाए तो ऐसे विचार अक्सर आते जाते रह्ते हैं....
wah....par udaasi ko sthai bhaav na banao bhai....yash
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